राजनैतिक, आर्थिक, संस्कृतिक मुद्दो और आम आदमी के सवालो पर सार्थक हस्तक्षेप Hastakshep.com | |
- ‘हमें सरकार से कोई उम्मीद नहीं’
- आल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन के पचहत्तर साल पूरे
- आल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन का इतिहास: भाग 5
- कानून का जूता सिर्फ जनता के लिए ?
- आइए नेता जी, बहिन जी की ताजपोशी के लिए ताली बजाते हैं
- बढ़िया लोग सिविल सोसायटी हो गए हैं क्योंकि घोंघा प्रसाद का भ्रष्टाचार मिटाना है
- ऐकू पर हिंद को नाज़ है
- घर बार : बच्चे की ठोस आहार की शुरुआत हो सही
- चैनलों का चरित्र:सच ख़बरों में है या फिर ख़बरों के पीछे
- क्रिकेट का करकट
| ‘हमें सरकार से कोई उम्मीद नहीं’ Posted: 11 Aug 2011 06:46 PM PDT जस्टिस हेगड़े की मजबूरी विजय प्रताप लोकपाल पर तमाम बहसों के बीच कर्नाटक के लोकपाल जस्टिस संतोष हेगड़े को अंततः कहना पड़ा कि कर्नाटक में खनन माफियाओं के खिलाफ उनकी रिपोर्ट पर सरकार से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट से ही किसी कार्रवाई की उम्मीद है। जस्टिस हेगड़े का यह वक्तत्व लोकपालों की प्रकाष्ठा का प्रदर्शन [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| आल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन के पचहत्तर साल पूरे Posted: 11 Aug 2011 09:25 AM PDT अंबरीश कुमार लखनऊ अगस्त। आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन पचहत्तर साल बाद फिर वही पर अपने छात्र नौजवानों कार्यकर्ताओं को बुला रहा है जहां से उसने अपना सफ़र शुरू किया था । आल इंडिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) की स्थापना 12-13 अगस्त 1936 को लखनऊ में ही ऐतिहासिक गंगा प्रसाद मेमोरियल हाल में हुई थी। और तब [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| आल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन का इतिहास: भाग 5 Posted: 11 Aug 2011 09:21 AM PDT महेश राठी आजादी का दिन जनवरी से अगस्त 1947 भारतीय स्वतंत्रता के लिए गहन राजनैतिक गतिविधियों से परिपूर्ण कठिन समय था। यह ए0आई0एस0एफ0 की संयुक्त जन कार्यवाहियांे का समय था। बम्बई के प्रांतीय गृहमंत्री मोरारजी देसाई ने 22 जुलाई को छात्रों की एक बैठक पर रोक लगा दी तो बम्बई के 60000 छात्र हड़ताल पर [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| कानून का जूता सिर्फ जनता के लिए ? Posted: 11 Aug 2011 09:11 AM PDT मधु भाई रामदेव जयपुर. हमारे राज्य के गृहमंत्री शान्तिलाल धारीवाल अपने मंत्रालय एवम् संभागीय स्तर के पुलिस मुख्यालय में तैनात पुलिस अधिकारियों की क्लास लेकर पुलिस महकामे की छवि को सुधारने में लगे है हाल में वो जोधपुर के दौरे पर थे और गृहमंत्री शान्तिलाल धारीवाल ने माना कि जोधपुर में अपराध बढ़े है लेकिन पुलिस महकमें [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| आइए नेता जी, बहिन जी की ताजपोशी के लिए ताली बजाते हैं Posted: 11 Aug 2011 08:03 AM PDT अमलेन्दु उपाध्याय उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव अब नजदीक ही हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की तरफ से ही चुनाव का रिहर्सल शुरू हो चुका है। आरोप प्रत्यारोप का नया दौर और एक दूसरे के घर फोड़ने का काम पूरे शवाब पर है। चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। लगता यही है [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| बढ़िया लोग सिविल सोसायटी हो गए हैं क्योंकि घोंघा प्रसाद का भ्रष्टाचार मिटाना है Posted: 11 Aug 2011 06:08 AM PDT जुगनू शारदेय सच बोलना तो अच्छा माना ही जाता है । 1967 तक झूठ तो असंसदीय शब्द भी था । जॉर्ज फर्णांडिस ने इसे संसदीय बनाया । कुछ लोग यह मान कर चलते हैं कि सरकार इसी संसदीय झूठ शब्द पर चलती है । झूठ बोलना भी और सच को समझना भी एक कला है [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| Posted: 11 Aug 2011 04:43 AM PDT शेष नारायण सिंह सुप्रीम कोर्ट के विचार के लिए एक अजीब मामला पेश किया गया है .अकबर नाम के एक बच्चे की कस्टडी का केस है . बच्चा मुसलमान माँ बाप का है . करीब सात साल पहले जब अकबर छः साल का था ,अपने पिता के साथ इलाहाबाद के एक शराबखाने पर गया था . बाप ने [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| घर बार : बच्चे की ठोस आहार की शुरुआत हो सही Posted: 11 Aug 2011 01:46 AM PDT दिव्या स्नेह जोशी 10 महीने के आहान की मां निशिता अग्रवाल पीडियाट्रिशियन से मिलने के बाद काफी दुखी व चिंतित हो गई। डाॅक्टर ने उन्हें बताया कि आहान ऐनीमिया से ग्रस्त है, क्योंकि उसके रक्त में आयरन की कमी है। निशित समझ नहीं पाई कि ऐसा कैसे हो गया? उनके लिए यह बेहद अफसोस की [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| चैनलों का चरित्र:सच ख़बरों में है या फिर ख़बरों के पीछे Posted: 11 Aug 2011 12:34 AM PDT फ़ज़ल इमाम मल्लिक समाचार चैनलों का चरित्र लगातार बदल रहा है और समाचारों का भी। चैनलों को देख कर तो कभी-कभी यह भी लगता है कि उनका कोई चरित्र है भी या नहीं। दरअसल अब ख़बरें बनती नहीं हैं, बनाई जाती हैं और चैनल अपने-अपने चरित्र के हिसाब से ख़बरें गढ़ते हैं और फिर ख़बरें [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| Posted: 11 Aug 2011 12:02 AM PDT |
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