Saturday, August 6, 2011

राजनैतिक, आर्थिक, संस्कृतिक मुद्दो और आम आदमी के सवालो पर सार्थक हस्तक्षेप Hastakshep.com

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मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है “वैचारिक आतंकवाद”

Posted: 06 Aug 2011 07:04 PM PDT

तनवीर जाफरी   मौजूदा दौर में आतंकवाद  दुनिया की सबसे बड़ी समस्या के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। इस विश्वव्यापी जटिल समस्या में आमतौर पर यही देखा जा रहा है कि प्राय: आतंकवादी गतिविधियों में कर्ता की भूमिका अदा करने वाले व्यक्ति किसी न किसी अतिवादी विचारधारा से पूरी तरह प्रभावित होते हैं। ऐसे [...]

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जंग-ए-आज़ादी में अहम् रोल निभाया था AISF ने

Posted: 06 Aug 2011 09:20 AM PDT

महेश राठी आल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन का बेहद गौरवमयी और प्रेरणाप्रद हिस्सा है। ए0आई0एस0एफ0 भारतीय स्वाधीनता संग्राम का वह भाग है जिसके माध्यम से देश के छात्र समुदाय ने आज़ादी की लड़ाई में अपने संघर्षों और योगदान की अविस्मरणीय कथा लिखी। भारतीय इतिहास में छात्रांे के इस गौरवशाली संघर्ष गाथा का सफर [...]

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जमीन पर खड़े सवाल

Posted: 06 Aug 2011 04:08 AM PDT

जरूरी हो जाता है, कि भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीमित जमीन पर उत्पादन इकाइयां लगाई जाएं। रहने के लिए घर, काम करने के लिए कारखाने और पोषण के लिए खेत। इन तीनों ही मोर्चो पर भारतीय जनता किन हालात में है, यह किसी से छुपा नहीं है। सचिन श्रीवास्तव बीते दो माह [...]

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‘स्वर्गवासी’ खबरें

Posted: 06 Aug 2011 03:48 AM PDT

आनंद प्रधान आइये, ‘खबरों’ की वापसी की खबर का स्वागत करें, बशर्ते यह सच हो… एक अच्छी खबर है. सुना है कि हिंदी न्यूज चैनलों पर 'खबर' की वापसी हो रही है. हालांकि ऐसी अफवाहें, माफ कीजिएगा, 'ख़बरें' काफी समय से चल रही हैं लेकिन कुछ अपवादों को छोड़ दें तो अधिकांश चैनलों पर अब [...]

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निराशाजनक है उत्तर प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य

Posted: 06 Aug 2011 03:29 AM PDT

- सुनील अमर लोकतांत्रिक प्रणाली में प्रबल बहुमत क्या सत्तारुढ़ राजनीतिक दल के भविष्य के लिए  बहुत मुफीद नहीं होता? क्या ऐसा होना उन्हें प्रशासनिक निरंकुशता और सांगठनिक उदासीनता की दिशा में ले जाता है? या राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का समाप्त हो जाना ही इन सारी समस्याओं का कारण है? देश के सबसे [...]

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नवउदारवाद की प्रयोगशाला में भ्रष्टाचार-4

Posted: 05 Aug 2011 10:33 PM PDT

किस्त-4 डॉ प्रेम सिंह कुछ साथियों को इंडिया अगेंस्ट करप्शन के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से लोकतंत्र संवर्द्धन होता नजर आता है। सिविल सोसायटी एक्टिविस्टों का इच्छित और प्रचारित सर्वशक्तिमान लोकपाल कोरा वैधानिक नहीं है। उसकी निर्मिती में भारतीयों की एक दिन सब को ठीक कर देने वाले तानाशाह के आने की दमित इच्छा की भी [...]

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व्यंग्य- पानी रे पानी

Posted: 05 Aug 2011 10:24 PM PDT

प्रमोद ताम्बट गर्मी भर पानी पानी पानी का राग अलाप-अलाप कर पागल हुए चले जा रहे थे, लो अब कितना पानी चाहिये। पानी हमारे लिए संघर्ष का स्थाई मुद्दा है, ना हो तब भी और हो तब भी। ना हो तब भी हम किसी विशेषज्ञ की तरह आसमान को निहारते हुए, एक-दूसरे से पूछते हैं [...]

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छलक उठा लोकायुक्त का दर्द कहा, प्रदेश में बढ़ रहा भ्रष्टाचार,

Posted: 05 Aug 2011 10:07 PM PDT

वार्षिक प्रतिवेदन में सरकारी उदासीनता स्वीकारी श्रीप्रकाश तिवारी लखनऊ। यूपी में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा काफी निराश हैं। उन्होंने कहा है कि इस प्रदेश में कतिपय ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। और ये वह क्षेत्र हैं जहां अत्यधिक धन व्यय हो रहा है। लेकिन ऐसी संस्थाओं में भ्रष्टाचार [...]

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आखिरकार किसानों को चाहिए क्या

Posted: 05 Aug 2011 09:01 PM PDT

आशीष वशिष्ठ सरकार और किसानों के बीच जमीन से जुड़े मामलों में जिस रफ्तार से बढ़ात्तरी हो रही, वो कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले देश भारत के लिए कोई शुभ संकेत नहीं है। सिंगुर से भट्टा पारसौल तक किसान लड़ते-भिड़ते, लाठी-डंडे और गोली खाने को मजबूर हैं और सरकार मदमस्त हाथी की भांति अपने भारी-भरकम कदमों [...]

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प्रेमचंद के पुनर्पाठ के लिए योग्‍य वारिस का होना है जरूरी- लाल बहादुर वर्मा

Posted: 05 Aug 2011 08:21 PM PDT

 वर्धा, 04 अगस्‍त,2011. कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती व गोदान के 75 वर्ष होने के उपलक्ष्‍य में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, इलाहाबाद में 75वें वर्ष में गोदान : एक पुनर्पाठ विषय पर आयोजित संगोष्‍ठी के दौरान अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य देते हुए इतिहासबोध पत्रिका के संपादक लाल बहादुर वर्मा ने कहा [...]

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