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- यह चूक नहीं सियासत के खेल में ठप होती व्यवस्था है
- खबर पर खामोशीः किस्सा फारबिसगंज
- ‘हत्या करे पुलिस, बदनाम हो नक्सली’
- मीडिया छवि का शिकार हो रहे हैं अन्ना
- यहां तो जीवन से मौत है सस्ती
- अन्ना के एक और ईमानदार पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण का हर दांव उल्टा
| यह चूक नहीं सियासत के खेल में ठप होती व्यवस्था है Posted: 08 Sep 2011 06:56 PM PDT पुण्य प्रसून बाजपेयी दिल्ली ब्लास्ट से पहले खुफिया जानकारी गृह मंत्रालय के पास थी। वहीं तीन महीने पहले मुंबई सीरियल ब्लास्ट के बारे में कोई खुफिया जानकारी गृह मंत्रालय के पास नहीं थी। दिल्ली में पहले से अलर्ट था जबकि मुबंई में अलर्ट नहीं था। लेकिन दोनों परिस्थितियो में ब्लास्ट हुआ। तो क्या आंतक के [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| खबर पर खामोशीः किस्सा फारबिसगंज Posted: 08 Sep 2011 12:00 PM PDT सुभाष गाताडे अपने निहित स्वार्थों में लिप्त मीडिया किस तरह घोर जनविरोधी भूमिका निभाने लगता है अपने एक लेख 'मीडिया एण्ड गवर्नेंस' की शुरुआत करते हुए पत्रकार मुकुल शर्मा आधुनिक सियासत/राजनीति के बारे में दिलचस्प बातें कहते हैं। उनका कहना है कि आधुनिक राजनीति एक mediated politic है जो ज्यादातर नागरिकों द्वारा ब्राॅडकास्ट और प्रिंट [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| ‘हत्या करे पुलिस, बदनाम हो नक्सली’ Posted: 08 Sep 2011 09:04 AM PDT हिमांशु कुमार दंतेवाडा में ये एक आम बात है ! पुलिस अपने कुकर्मो को नक्सलियों के सिर मढ़ देती है ! पुलिस की बात तो मीडिया छाप देती हैं और आम लोग ये मान कर चुप हो जाते हैं की ‘ नक्सली तो हैं ही क्रूर ‘ अपनी बात को सिद्ध करने के लिए मैं एक ऐसा [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| मीडिया छवि का शिकार हो रहे हैं अन्ना Posted: 08 Sep 2011 08:37 AM PDT शिशिर सिंह बाबूराव किशन हजारे उर्फ अन्ना हजारे लोकप्रियता की ऊँचाई पर हैं। क्षेत्रीय सामाजिक कार्यकर्ता से उनकी छवि अब देश के सामाजिक कार्यकार्ता के रूप में होने लगी है। महाराष्ट्र से शुरू हुआ उनका सफर अब देशाटन में बदल चुका है। महाराष्ट्र में तो वह पहले ही काफी जाना-पहचाना नाम थे, जनलोकपाल आन्दोलन [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| Posted: 08 Sep 2011 05:12 AM PDT तुगलकाबाद फैक्ट्री हादसे के शिकार मजदूरों की कहानी ठीक राजधानी में इतना बड़ा हादसा होता है, लेकिन राजधानी के एक भी पत्रकार ने इस पर कोई स्टोरी नहीं दी. आई तो बस हादसे की एक छोटी सी खबर. शांतनु ने हफ़्तों वहां जाकर तथ्य जुटाया फिर यह लेख लिखा है. वे मजदूर परिवारों के साथ [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| अन्ना के एक और ईमानदार पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण का हर दांव उल्टा Posted: 08 Sep 2011 02:20 AM PDT |
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