Tuesday, November 8, 2011

राजनैतिक, आर्थिक, संस्कृतिक मुद्दो और आम आदमी के सवालो पर सार्थक हस्तक्षेप Hastakshep.com

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पेट्रोल की बेलगाम कीमत और सरकार की संवेदनहीनता

Posted: 08 Nov 2011 05:38 PM PST

विपिन किशोर सिन्हा वाकई अब हद हो गई। क्या अंग्रेजों की सरकार भी इतनी संवेदनहीन थी? शायद नहीं। आखिर यह सरकार किसकी है – पूंजीपतियों की, कारपोरेट घरानों की, तेल कंपनियों की या जनता की? सरकार का कोई भी प्रतिनिधि प्रथम तीन की सरकार होने की बात कभी भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं कर [...]

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मीडिया पर जस्टिस मार्कण्डेय के विचार और घालमेल का संकट

Posted: 08 Nov 2011 10:56 AM PST

वीरेन्द्र जैन एक बार फिर से आम पढा लिखा व्यक्ति दुविधा में है। वह जब जिस कोण से बात सुनता है उसे उसी की बात सही लगती है और वह समझ नहीं पाता कि सच किस तरफ है। दर असल दोष उसका नहीं है अपितु एक ही नाम से दो भिन्न प्रवृत्तियों को पुकारे जाने [...]

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प्रेस की आज़ादी की अवश्य पड़ताल होनी चाहिए

Posted: 08 Nov 2011 06:11 AM PST

जस्टिस मार्कंडेय काटजू भारत में मीडिया जो भूमिकाएँ निभा रहा है उसे समझने के लिए सबसे पहले हमें ऐतिहासिक संदर्भों को समझना होगा। वर्तमान भारत अपने इतिहास में एक संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है: एक सामंती खेतिहर समाज से आधुनिक औद्योगिक समाज की ओर। यह एक बहुत पीड़ादायक और व्यथित कर देने वाला [...]

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गंगा के लिए, गंगा के किनारे, सांप्रदायिक सद्‌भाव का ऐतिहासिक सम्मेलन

Posted: 08 Nov 2011 12:10 AM PST

विपिन किशोर सिन्हा ऐसी ऐतिहासिक घड़ियां बहुत कम ही आती हैं जब हिन्दू और मुसलमान एक साथ, एक ही स्वर में, एक ही मंच से एक ही बात कहें। ऐसी घड़ी का साक्षात्कार गंगा भक्तों ने किया – दिनांक ५ नवंबर को सायंकाल ६ बजे, काशी के ऐतिहासिक अस्सी घाट के नवनिर्मित महामना मालवीय घाट [...]

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विलक्षण प्रतिभावान प्रवासी क्रांतिकारी -लाला हरदयाल

Posted: 07 Nov 2011 08:28 PM PST

14 अक्तूबर 1884-4 मार्च 1939 सुनील दत्ता लाला हरदयाल जी के बारे में लोग कम ही जानते है | उसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि उनकी वैचारिक एवं व्यवहारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र देश से बाहर विदेश में खासकर अमेरिका में रहा | लाला जी में प्रचण्ड बौद्धिक क्षमता के साथ आत्म त्याग [...]

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यूपीए सरकार का खेल, जिसके लिए बना रहे क़ानून उससे पूछा ही नहीं

Posted: 07 Nov 2011 07:10 PM PST

  नया भूमि अधिग्रहण विधयेक और उसके मसौदे में संशोधन ( क्या किसानो के हित में , या किसानो के विरोध में ) सुनील दत्ता इस अन्याय का प्रतिकार भूमि अधिग्रहण का मार सहने वाले किसानो और उससे ग्रामीणों को ही करना होगा | उन्हें भूमि अधिग्रहण और उसके मसौदा को , उसमे किये जाते [...]

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