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- अंगूर नहीं खट्टे, छलांग लगी छोटी
- अब तकनीक रौंद रही है दलितों को
- सुषमा स्वराज का प्रलाप
- बामुलाहिजा : वन-डे का जमाना है !!
- उड़ीसा में पोस्को परियोजना से फायदा कौन उठाएगा?
- तो क्या फ़ेसबुक अब फ़ेकबुक में तब्दील है?
| अंगूर नहीं खट्टे, छलांग लगी छोटी Posted: 27 Mar 2012 10:01 AM PDT दयानंद पांडेय 'क्षमा करें! मैं कुछ नहीं हूं। न गाय, न जनता मेरे सीने में अब दूध का समुद्र नहीं उफनता।' सरीखी कविता लिखने वाले देवेंद्र कुमार बंगाली का २१ साल पहले जब निधन हुआ, तो वह अखबारों में छोटी से सुर्खी भी नहीं बन सके। 'आते जाते राह बनाते। तुम से पेड़ भले।' जैसे गीत [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| अब तकनीक रौंद रही है दलितों को Posted: 27 Mar 2012 09:52 AM PDT हाल-ए-शेखावटी भंवर मेघवंशी दलितों पर अत्याचार के ऐसे कई मामले राजस्थान में अक्सर उजागर होते रहते है, जहां पर कृषि के काम में आने वाले टेªक्टर दलितों को कुचलने व रोंदने के काम आ रहे है, पाली जिले की जैतारण तहसील के बेडकलां गांव के जागरूक अम्बेडकरवादी कार्यकर्ता मोहन मेघवाल की शहादत को हम नहीं [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| Posted: 27 Mar 2012 09:40 AM PDT विपिन किशोर सिन्हा भारत के पूर्व प्रधान मंत्री और विश्व राजनीति के शिखर पुरुष श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में एकबार दिव्य सुक्ति कही थी कि बोलने के लिए सिर्फ वाणी की आवश्यकता होती है, लेकिन चुप रहने के लिए वाणी और विवेक, दोनों की आवश्यकता होती है। उनके अस्वस्थ होने से छुटभैया [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| बामुलाहिजा : वन-डे का जमाना है !! Posted: 27 Mar 2012 05:28 AM PDT |
| उड़ीसा में पोस्को परियोजना से फायदा कौन उठाएगा? Posted: 27 Mar 2012 05:25 AM PDT आर्थिक विश्लेषकों की प्रत्यक्ष एवं परोक्ष समीक्षा एवं उनके यह विचार कि भारत में उड़ीसा राज्य एवं उसकी जनता के हित के लिए पोस्को प्रोजेक्ट हस्ताक्षरित नहीं किया गया है। हम इस बात को पूछने पर मजबूर हैं कि आखिर इससे कौन लाभान्वित होगा और जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? संभवतः यह बात रेखांकित [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
| तो क्या फ़ेसबुक अब फ़ेकबुक में तब्दील है? Posted: 26 Mar 2012 10:28 PM PDT दयानंद पांडेय मित्रों पता नहीं क्यों अब कई बार लगता है कि फ़ेसबुक अब फ़ेकबुक में तब्दील है। बल्कि फ़ेकबुक का किला बन गया है यह फ़ेसबुक। छ्द्म क्रांतिकारिता के मारे मुखौटे पहने लोगों की फ़ौज, हर घंटे चार-छ लाइन की कविता और उस के साथ नत्थी एक फ़ोटो लगाई औरतें, जिन्हें न किसी शब्द [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
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