Tuesday, May 8, 2012

राजनैतिक, आर्थिक, संस्कृतिक मुद्दो और आम आदमी के सवालो पर सार्थक हस्तक्षेप Hastakshep.com

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प्रेमचंद एक अनुभव

Posted: 08 May 2012 10:22 AM PDT

दयानंद पांडेय जिस बरस प्रेमचंद जन्मशती मनाई जा रही थी यानी 1980 में, जनवादी लेखक संघ ने प्रेमचंद के जन्म-स्थान लमही में त्रिदिवसीय प्रेमचंद मेला लगाया था। मैं भी गया था। बड़ी तड़क भड़क तो नहीं थी मेले में – मेला गंवईं भी नहीं था। मेला था कुछ जनवादी लेखक और रंगकर्मी बंधुओं का। मेले [...]

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मुसलमानों को लॉलीपॉप के ख़िलाफ़ एक स्वागत योग्य फ़ैसला

Posted: 08 May 2012 09:54 AM PDT

अभिरंजन कुमार हज यात्रा पर सब्सिडी ख़त्म करने का आदेश देकर सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को आईना दिखाने का काम किया है। और आईना क्या दिखाया है, पोल खोली है। कोर्ट ने कहा कि तीर्थ-स्थलों पर जाने के लिए इस तरह की सब्सिडी देना अल्पसंख्यकों को लुभाने जैसा है। जिस सब्सिडी को ख़ुद मुसलमानों [...]

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“आदिवासी समाज और हमारी जिम्मेदारियां”

Posted: 08 May 2012 09:30 AM PDT

बातचीत | "आदिवासी समाज और हमारी जिम्मेदारियां" वक्ता – बी डी शर्मा, भारत जन आंदोलन समय – 11 मई 2012, दोपहर 2 बजे स्थान – गांधी शांति प्रतिष्ठान, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, आईटीओ, नई दिल्ली आयोजक युवा संवाद और जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसायटी (जेयूसीएस) संपर्क : ए के अरुण 9868809602, अवनीश 8010319761 शाह आलम 9873672153

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मगर जनसत्ता ने घास न डाली जनसत्ताइयों को !

Posted: 08 May 2012 09:20 AM PDT

पंजाबी में एक कहावत है कि जो औरत किसी और के बच्चे को खुद उस से भी ज़्यादा प्यार करे तो वो ड्रामा कर रही मानी जाती है. ‘जनसत्ता’ (चंडीगढ़) की स्थापना की पच्चीसवीं सालगिरह पर देश भर से जुटे उस के पूर्व पत्रकारों के साथ ऐसा ही कुछ हुआ. कायदे से कार्यक्रम खुद कंपनी [...]

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शायद इस देश का हूँ ही नहीं- लिंगा कोडोपी

Posted: 08 May 2012 07:28 AM PDT

आदरणीय बुद्धिजीवियों, मैं इस आशा से यह पत्र लिख रहा हूँ कि मेरे साथ व अन्य आदिवासियों के साथ हुए प्रताडनाओं व अन्याय का आप लोग न्याय करेंगे | मैं देश के तीन स्तंभ से गुजर चुका हूँ ! कार्यपालिका, न्यायपालिका, मिडिया! इन तीनों स्तंभो से मुझे व अन्य आदिवासियों को न्याय मिलेगा ऐसा उम्मीद [...]

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चंडीगढ़ जनसत्ता के पच्चीस बरस पूरे, रजत जयंती पर पुनर्मिलन समारोह

Posted: 08 May 2012 06:30 AM PDT

महेंद्र सिंह राठौड़ छह मई, 1987 को चंडीगढ़ से जनसत्ता अखबार को निकले छह मई, 2012 को पूरे पच्चीस साल हो गए। जाहिर है यह दिन अखबार के लिए विशेष था। शुरू के बहुत वर्षों तक इस दिन विशेष आयोजन भी होता रहा लेकिन सिलसिला टूटा तो टूट ही गया। हर साल यह दिन आता [...]

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अनिवार्य परिघटना है, नामवर सिंह के हाथों आलोचना का अंत

Posted: 08 May 2012 03:41 AM PDT

आलोचना का पराभव और नामवर सिंह  जगदीश्वर चतुर्वेदी                         हाल ही में राजकमल प्रकाशन के द्वारा नामवर सिंह के विचारों,आलोचना निबंधों ,व्याख्यानों और साक्षात्कारों पर केन्द्रित 4 किताबें आयी हैं। चार और आनी बाकी हैं। इन किताबों का 'कुशल' संपादन आशीष त्रिपाठी ने किया है। ये किताबें आधुनिक युग में विचारों की [...]

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जय प्रकाश उद्योगिक समूह के करिश्मे – घोटाला ही घोटाला

Posted: 08 May 2012 03:18 AM PDT

प्रिय  साथियो , जे  पी  थर्मल  प्लांट  बघेरी  पर मुझे सब के नाम  यह  पत्र इसलिए लिखना  पड रहा  है  क्योंकि  आज  कल  हिमाचल  की हिंदी व अंग्रेजी  अखवारों  में  व्यान्नवाजियों   का  भुचालल  सा  आ   गया  है. ये  सभी  राजनैतिक  वक्तव्य पिछले  पांच  साल  पुरे  आन्दोलन  के  दोरान  कही  नहीं  दिखे. इस लिए मैंने यह [...]

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समय से मुठभेड़ करती कविताएं

Posted: 08 May 2012 01:35 AM PDT

 डॉ. सुभाष राय प्रो रमेश दीक्षित के एकल काव्यपाठ से आरम्भ का पुनरारम्भ   प्रख्यात कवि नरेश सक्सेना का आरम्भ प्रभावशाली रहा। आरम्भ की गोष्ठी  या गोष्ठी  का आरंभ, चाहे जो कह लें। कह सकते हैं आरम्भ का पुनरारम्भ भी। एक कवि आया क्षितिज पर। सभी जानते हैं कि प्रो. रमेश दीक्षित बेहतरीन राजनीतिक चिंतक [...]

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चारों तरफ अराजकता का माहौल है संस्कृति मंत्रालय के विभागों में

Posted: 08 May 2012 12:58 AM PDT

शेष नारायण सिंह नई दिल्ली. संस्कृति मंत्रालय के काम काज के बारे में संसद की  स्थायी समिति की 175वीं रिपोर्ट सोमवार को संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी गई. लोक सभा में यह रिपोर्ट अनुराग सिंह ठाकुर और महेश जोशी  के नाम से प्रस्तुत की गई. इस कमेटी के अध्यक्ष राज्य सभा के सदस्य, सीताराम येचुरी [...]

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मायावती के सर्वजन और बहुजन को एक झटके में बांट दिया अखिलेश ने

Posted: 08 May 2012 12:37 AM PDT

अंबरीश कुमार लखनऊ ,मई ।प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागु कराकर मुख्यमंत्री ने मायावती के सर्वजन और बहुजन समीकरण को न सिर्फ तोड़ दिया है बल्कि अगड़ो और पिछड़ों का नया समीकरण बना दिया है जिसमे मुस्लिम भी साथ है ।इस फैसले के खिलाफ आज यहाँ दलित नेता आरके चौधरी [...]

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अच्छी रचना रोज-रोज नहीं लिखी जाती।

Posted: 08 May 2012 12:15 AM PDT

मेरे लिए लिखना, कबाड़ खाने से साइकिल कसने की तरह है :शिवमूर्ति कथाकार और उपन्यासकार शिवमूर्ति के बिना अब हिंदी कहानी की बात हो नहीं पाती। प्रेमचंद और रेणु की परंपरा की नदी सच कहिए तो शिवमूर्ति की कथा में ही साफ बहती है। बिना किसी प्रदूषण से प्रभावित। शायद इसी लिए वह कम लिख [...]

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