राजनैतिक, आर्थिक, संस्कृतिक मुद्दो और आम आदमी के सवालो पर सार्थक हस्तक्षेप Hastakshep.com | ![]() |
- खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी का धरना
- कालजयी रचना लेखक और पाठक की साझेदारी से जन्म लेती है : दूधनाथ सिंह
- मीडिया ने भाकपा और वामपंथ को पूरी तरह से दबाया
- साहेब की कविता
- दुनिया एक मंदी से निकल नहीं सकी और दूसरी दस्तक दे रही है
- महानरों में बढ़ते तलाक
- साम्यवाद की असफलता नहीं यह ‘आधुनिकीकरण की छलयोजना’ है
- बंगाल की नई तानाशाह, जिसने कुचला लोकतंत्र
- मजदूर को कठोर श्रम के बाद भी रु. 12,000 की गारण्टी नहीं और बेरोजगार को मिलेंगे रु. 12,000 !!!
- सिंगरौली का संघर्ष
- कलम का ‘सिपाही’ बनने की आपाधापी
- रेलवे को खान पान व्यवस्था दुरुस्त करने का हुक्म दिया संसद की स्थायी समिति ने
- अच्छे शिक्षक, कवि और मनुष्य थे भगवत रावत
खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी का धरना Posted: 29 May 2012 09:20 AM PDT सोशलिस्ट पार्टी (सोपा) के स्थापना दिवस (28 मई) के अवसर पर खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के फैसले के विरोध में जंतर मंतर पर एक दिन का धरना दिया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सेदारी की। धरने को संबोधित करते हुए जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने कहा वालमार्ट जैसी विशाल खुदरा चेन कंपनियों का [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
कालजयी रचना लेखक और पाठक की साझेदारी से जन्म लेती है : दूधनाथ सिंह Posted: 29 May 2012 09:00 AM PDT साहित्यिक आयोजन 'मेरी शब्दयात्रा' कथाकार को कभी-कभी अपनी कुर्सी छोड़कर पाठक की कुर्सी पर भी बैठना चाहिए। लेखक को पाठक से साझेदारी करनी चाहिए। जो धीरे-धीरे विकसित होती है। हालांकि पाठक की तरफ से यह देर से पैदा होती है। सन 1959 में 'सपाट चेहरे वाला आदमी'कहानी लिखकर जो 'लहर' पत्रिका में छपी, अपने कथा [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
मीडिया ने भाकपा और वामपंथ को पूरी तरह से दबाया Posted: 29 May 2012 06:46 AM PDT भाकपा राज्य कौंसिल बैठक – 13-14 मई 2012 – उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हालात पर रिपोर्ट भूमंडलीकरण के इस दौर में केन्द्र एवं राज्यों में सत्तारूढ़ पूंजीवादी राजनैतिक दल आर्थिक नवउदारवाद की राह पर चल रहे हैं। इससे जनता का संकट बढ़ रहा है। यही वजह है कि जिन दलों को जनता चुन कर सत्ता [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
Posted: 29 May 2012 04:59 AM PDT राजीव मित्तल एक सरकारी दफ्तर जैसा कुछ….ऐंडी-बेंडी कुर्सियां….तीन टांग की मेजें….फटहे पोंछा जैसा कालीन…यहां-वहां पड़े हत्था टूटे प्याले, जिनके पेंदे की बची चाय में कुछ मक्खियां गोता लगा कर शीर्षासन कर रहीं तो कुछ चटखारे ले कर भन भना रहीं। हॉलनुमा दड़बे में एक और दड़बा, जहां साहब बैठते हैं। शायद बैठे भी हैं…क्योंकि स्टूल [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
दुनिया एक मंदी से निकल नहीं सकी और दूसरी दस्तक दे रही है Posted: 29 May 2012 03:52 AM PDT प्रदीप तिवारी जागरण में अंशुमान तिवारी ने एक लेख में लिखा है कि "स्पेनी डुएंडे ने अमरीकी ब्लै कबियर्ड घोस्ट (दोनों मिथकीय प्रेत) से कहा … अब करो दोहरी ड्यूटी। यह दुनिया वाले चार साल में एक मंदी खत्म नहीं कर सके और दूसरी आने वाली है।… यह प्रेत वार्ता जिस निवेशक के सपने में [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
Posted: 29 May 2012 03:47 AM PDT राजीव गुप्ता भारत के प्रमुख महानगरो जैसे दिल्ली, मुम्बई, बैगलूरू , कोलकाता , लखनऊ में आये दिन तलाको की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है! अभी तक यह गलत धारणा थी कि तलाक की समस्या छोटे शहरो और बिना पढ़े-लिखे समाज में ज्यादा है परन्तु आंकड़े कुछ और ही इशारा करते है! एक सर्वे के अनुसार 1960 [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
साम्यवाद की असफलता नहीं यह ‘आधुनिकीकरण की छलयोजना’ है Posted: 29 May 2012 02:27 AM PDT जगदीश्वर चतुर्वेदी उत्तर आधुनिकतावादी विकास का प्रधान लक्षण है व्यवस्थागत भ्रष्टाचार,नेताओं में संपदा संचय की प्रवृत्ति, अबाधित पूंजीवादी विकास,उपभोक्तावाद की लंबी छलांग और संचार क्रांति। इन लक्षणों के कारण सोवियत अर्थव्यवस्था धराशायी हो गयी। सोवियत संघ और उसके अनुयायी समाजवादी गुट का पराभव एक ही साथ हुआ। सामान्य तौर इस पराभव को मीडिया में साम्यवाद [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
बंगाल की नई तानाशाह, जिसने कुचला लोकतंत्र Posted: 29 May 2012 01:36 AM PDT बाजार के दबाव में ममता बनर्जी बंगाल की नई तानाशाह, जिसने कुचला लोकतंत्र के मौलिक अधिकारों को। एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास ममता बनर्जी बंगाल की नई तानाशाह। जिसने कुचला लोकतंत्र के मौलिक अधिकारों को।नंदीग्राम, सिंगुर और लालगढ़ के जनांदोलनों का नेतृत्व करते हुए चौतीस साल के माक्सवादी दलतंत्र की जिस तानाशाही के विरोध का प्रतीक बनकर [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
मजदूर को कठोर श्रम के बाद भी रु. 12,000 की गारण्टी नहीं और बेरोजगार को मिलेंगे रु. 12,000 !!! Posted: 29 May 2012 12:32 AM PDT न्यूनतम मजदूरी का सवाल पिछले बीस वर्षों में सेवा क्षेत्र की तनख्वाहों में पंद्रह गुणा की बढ़ोतरी हुई है। इसी दौर में न्यूनतम मजदूरी तीन गुणा भी नहीं बढ़ी है। सेवा क्षेत्र, जिसमें काम करने वालों की संख्या देश की आबादी एक बहुत छोटा प्रतिशत है, की तनख्वाहें बढ़ने से मंहगाई बढ़ गई जिसका प्रतिकूल [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
Posted: 28 May 2012 10:53 PM PDT पुण्य प्रसून बाजपेयी यह रास्ता जंगल की तरफ जाता जरुर है लेकिन जंगल का मतलब सिर्फ जानवर नहीं होता। जानवर तो आपके आधुनिक शहर में हैं, जहां ताकत का एहसास होता है। जो ताकतवर है उसके सामने समूची व्यवस्था नतमस्तक है। लेकिन जंगल में तो ऐसा नहीं है। यहां जीने का एहसास है। सामूहिक संघर्ष [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
कलम का ‘सिपाही’ बनने की आपाधापी Posted: 28 May 2012 10:39 PM PDT 30 मई , हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष विवेक दत्त मथुरिया हिन्दी पत्रकारिता का पावन पर्व 30 मई । भारत में पत्रकारिता की पहली दस्तक और पहला कदम आगस्टन हिकी का था और दूसरा कदम पं. युगल किशोर शुक्ल का। 30 मई 1826 को प. युगल किशोर शुक्ल ने अपने संपादकत्व में कोलकता से उदन्त [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
रेलवे को खान पान व्यवस्था दुरुस्त करने का हुक्म दिया संसद की स्थायी समिति ने Posted: 28 May 2012 09:00 PM PDT शेष नारायण सिंह नई दिल्ली ,२८ मई. जुलाई २०१० में रेलवे बोर्ड ने नई कैटरिंग पालिसी की घोषणा की थी और २००५ की नीति को पलट दिया था . २००५ की नीति में ट्रेनोंमें खान पान की व्यवस्था का सारा ज़िम्मा सरकारी कंपनी आई आर टी सी के हवाले कर दिया था. लेकिन रेल विभाग ने २०१० [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
अच्छे शिक्षक, कवि और मनुष्य थे भगवत रावत Posted: 28 May 2012 08:49 PM PDT प्रलेस की इंदौर इकाई ने भगवत रावत को याद किया इंदौर, २८ मई २०१२. उनकी जिजीविषा अद्भुत थी. कोई कष्ट और बीमारी उनके जीने के हौसले को कम नहीं कर सकी. साहित्य उनके लिए लोगों को जानने और जीवन के नज़दीक होने का जरिया रहा. उनके इतने काव्य संग्रह आये और अनेक पुरस्कार मिले लेकिन [...] पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/ |
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