माकपा महासचिव का. प्रकाश करात के नाम खुला-खत
का. प्रकाश करात
माकपा महासचिव
नयी दिल्ली
प्रिय का. प्रकाश करात,
आप जानते है कि बेलगाम आक्रामक "साम्प्रदायिक-आवारा पूंजीवाद" के नेतृत्व में हाल ही में पिछले दिनों भारत में "प्रति-क्रान्ति" सम्पन्न हुई है.
जाहिर है, इस विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए भारतीय मजदूरवर्ग की "व्यापक एकता" की दरकार है. आज के हालात में 'लेनिनवाद या माओवाद के नाम पर अलग-अलग जो कोई भी दूकान चलाना चाहता है वह मजदूरवर्ग का सबसे बड़ा भीतरघाती शत्रु है.
जनाधार में आयी गिरावट और क्षरण के बाबजूद; दक्षिण एशिया में माकपा की हैसियत आज भी 'दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कम्युनिष्ट पार्टी' कहलाने की हकदार है. इसलिए एकीकृत कम्युनिष्ट पार्टी के लिए माकपा को ही ऐतिहासिक पहल करनी होगी.
देश-दुनिया के लोगों ने आपके नेतृत्व में माकपा को (२००५-२००९) में आजादी के बाद सबसे बड़ा चढ़ाव और २०१४ में सबसे बड़ा उतार भी देख लिया है.
हमे फक्र है कि जेएनयू ने माकपा को कम-से-कम दो-तीन राष्ट्रीय-स्तर के नेता दिए है. का. येचुरी, का. सुनीत चोपड़ा और आपके साथ मेरा इस नाते भी आत्मीय लगाव रहा है. खासकर वृंदा जो अक्सर मुस्करा कर मेरा अभिवादन स्वीकार किया करती थी... वह माकपा के साथ डोर बांधे रखने के लिए प्रयाप्त था. हालांकि, दिल्ली में (खासकर १४ विट्ठलभाई पटेल हाउस) में बैठे कुछ अन्य लोगों से मिलने का अनुभव कुछ इस कदर भी हुआ...जैसे मैं पुराना लाल किले के अंदर "जू घर" में "भालू-चीता-शेर" देखने आया हुआ हूँ.
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ,
ए. सी. प्रभाकर
निदेशक- तीसरी दुनिया का सामाजिक नेटवर्क्स
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