आप सब अचानक इन्सान मेें से जानवर बन गये..........?!
अभी अभी ही मैंं मेरी आँखों से आप की बर्बरता देखकर आया हूँ. आप लोगों ने यहाँ रक्तपात कर के भारतमाता के वदन पर कलंक लगाया है. यह लोग तो आप के साथ सदाकाल से ही रहते आये थे. जिन्हें आप कल तक शायद काका, मामा, बेटा, बेटी कह कर पुकारतेेेे होंगे. उन्हें आपने काट डाला. ये निर्दोष, बिना हथियार वाल बच्चे, बूढें, औरतें, मरद पर आप क हाथ किस तरह से उठ सकें ? यह कैसा पागलपन आप के माथे सवार हो गया के आप यकायक इन्सान में से जानवर,मानवमें से दानव बन गये?
उन्होेें ने आप का क्या बिगाडा था ? नोआखाली का बदला लिया है न आपने क्यूँ ! ? इन लोगों में से कौन नोआखाली गया था, हिंदुओं की कतल करने ? वहाँ का बदला आपने यहाँ लिया ? निर्दोष लोगों के ऊपर ? इस ढंग से तो पूरा दश जल जायेगा, भारत तबाह हो जायेगा.
जयप्रकाश नारायण - (1946 के दंगों क समय)
(जे. पी. शताब्दि विशेषांक)
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
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