Sunday, January 4, 2015

हिंदुत्व के य़े पाठ आपने किस धर्मशास्त्र में पढेें ................?

हिंदुत्व के य़े पाठ आपने किस धर्मशास्त्र में पढेें ............?

आप लोग अपने स्वयं को हिंदु कहलाते हो. हिंदुत्व के जोश में आकर आप ऐसी बर्बरता पर उतर आयें ! क्या आपका धर्म आप को निर्दोष बच्चे, स्त्रीयाँ, बुढ्ढेे और युवानों की गर्दनें दबाकर हत्या करना और बेरहमी से कतल करने को सीखाता है -  हिंदुत्व के ऐसे पाठ आपने किस धर्मशास्त्र में पढें हैं - हिंदु धर्म राक्षसता नहीं सीखाता. तो फिर आप कैसे हिंदु हैं - शर्म आनी चाहिए आप को - शर्म से डूब मरना चाहिए आप को उसी कुए में जिसमें अपने पडोसियों को आपने काट कर फेंका था.
मैं स्वयं बहुत शर्म का एहसास कर रहा हूँ. मैं एक हिंदु परिवार में जनमा इसलिए हिंदु माना जाता हूँ. एक हिंदु के नाते मैं मेरे स्वयं को अपराधी मानता हूँ. बर्बरता और रक्तपात कोई धर्म सीखाता नहीं. यह तो हम स्वयं ही धर्म के नामपर बडे से बडा अधर्म का आचरण करते हैं. 
हम सब सब से पहले इन्सान हैं, फिर और कुछ - हिंदु, मुसलमान, सीख, इसाई आदि आदि. कोई भी व्यक्ति अपना धर्म बदल सकता है, दिन में चार बार भी बदल सकता है, लेकिन वह अपनी इन्सानियत, अपनी मनुष्यता चाहे जितनी करने पर भी नहीं बदल सकता. कभी नहीं. 

(1946 के दंगों के समय)       -- जयप्रकाश नारायण.
( ऊपर दिया हुआ उद्धरण आज भी हूबहू उतना ही लागू है, जितना 1946 के समय था. और वह उतना ही लागू होता है जो धर्माँध हैं, फिर वे किसी भी धर्म के हों.  ---- डॅनियल.)





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सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः

                            " सत्य, अहिंसा और संयम "
         


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