यह तथ्य हमने ज प जी से सुना...........................
मेरा ऐसा मानना है कि विनोबाजी ने उनके अपने तरीके से गांधीजी के संकेतों को पूरा करने का प्रचंड पुरूषार्थ किया. भूदान आंदोलन शुरू हुआ, तब प्यारेलाल जी ने कहा था, "गांधीजी का विचार आज पुनर्जीवित हुआ है. विनोबा उसका अनुवर्तन कर रहे हैं. "
विनोबा ने एक व्यापक लोक-आंदोलन का वैसे ही लोक-शिक्षण का कार्यक्रम देश को दिया. उन्हों ने गांधीजी का अधूरा काम आगे बढाया. गांधीजी के हाथों से गिरी हुई मशाल उठाकर वे आगे बढे. उन्हों ने ग्रामस्वराज्य के चिंतन को बहुत आगे बढाया.
जयप्रकाश नारायण - (भूमिपुत्र से, जे पी शताब्दि विशेषांक - 1 - 1- 2002.)
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
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