यह तथ्य हमने ज प जी से सुना..........................
स्वराज्य के बाद के ध्येय के लिए गांधीजी ने सर्वोदय विचार हम सब के सामने रखा ही था. सर्वोदय यह जनता का समाजवाद है. जनता का अथवा स्वैच्छिक समाजवाद जितना अधिक मात्रा में होगा और राज्य द्वारा लादा हुआ समाजवाद जितना कम होगा, उतना समाजवाद ज्यादा पूर्ण और यथार्थ बनेगा. मुझे ऐसा पक्का विश्वास हो गया है कि दुनिया में यदि कभी भी स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और शांति की स्थापना करनी हो, तो समाजवाद को आखिर जाकर सर्वोदय में विलीन होना पडेगा.
जयप्रकाश नारायण - भूमिपुत्र से - 1 - 10 - 2002,
(जे पी शताब्दि विशेषांक)
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
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