---------- Forwarded message ----------
From: Daniel Mazgaonkar <daniel.mazgaonkar@gmail.com>
Date: 2014-12-19 11:24 GMT+05:30
Subject: यह तथ्य हमने धीर पुरूषों से सुना................
To:
--
From: Daniel Mazgaonkar <daniel.mazgaonkar@gmail.com>
Date: 2014-12-19 11:24 GMT+05:30
Subject: यह तथ्य हमने धीर पुरूषों से सुना................
To:
यह तथ्य हमने धीर पुरुषों से सुना......................
गांधीजी एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना चाह रहे थे कि जिस में हिंसा को जरा-सा भी स्थान न होगा और मानव-समाज युद्ध के अभिशाप से मुक्त हो. अब, इस के लिए जड-मूल से कोशिष करनी होगी, अहिंसक शक्तियों का विकास करना पडेगा, युद्ध की जडों को उखाड फेंकना होगा. युद्ध की बुनियाद तो लोगों के चित्त में होती है, उन की शिक्षा-पद्धति में रही होती है, उन की आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक संस्थाओं और प्रणालिकाओं में होती है. जब तक इन सारे क्षेत्रों को हम छूएंगे नहीं, तब तक हिंसा को एवं युद्ध को दुनियाभर से निकाल बाहर करने की मंशा तो मात्र कोरी (वांझणी) मंशा ही रहेगी. गांधीजी इस बात को बराबर समझे थे.
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
सर्वादय आंदोलन के 1974-77 के समय में जो कार्यकर्ता संघर्ष में लगे थे उन्हें विनोबाजी ने एक अमूल्य संदेश दिया था, जो सब को आज भी उतनाही जीवन में उतारने के योग्य हैः
" सत्य, अहिंसा और संयम "
No comments:
Post a Comment